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Showing posts from September, 2015

आओ दो परिवार स्वर्ग बनाए

जिस दिन आपकी शादी हो उस दिन अपने पत्नी या पती से कहना सुनो आज से आपके माता पिता मेरे माता पिता है और मेरे माता पिता आपके माता पिता है। जिस दिन आप सभी यह मान लोगे उस दिन कोई भी माता पिता वृधाश्रम में नहीं मिलेगे पत्नी अपने सास को माँ समझे और पति अपने ससुर को पिता समझे उस दिन वह दो परिवार स्वर्ग बन जाएगा।

आपके विचार आपके सेहत पर परिणाम कर सकते है

वैसे तो विचार के बोहोत सारे प्रकार है पर मुख्यता विचार दो टाइप में डीवाइड होते है। सकारात्मक विचार नकारात्मक विचार सबसे पहले आपको एक दुनिया का एक नैसर्गिक नियम है जिसे सबने स्वीकार किया है उसके बारे में बताता हु 🏻 अगर किसी चीज को आप पूरी शिद्धत से चाहो और उसे पाने की कोशिश करते हो तो पूरी कायनात और  सृष्टि आपको उसे मिलाने में लग जाती है। यह सृष्टी का नियम अगर आप सोचते हो तो आप को पता चलेगा आप जो सोचते हो आप वह बन जाते हो तो ऐसा ही सोचो जो आपको चाहिए। मतलब आपके सकारात्मक विचार आपको जो चाहिए वह दिला सकता है। अब आप यह सोचोगे के सिर्फ सकारात्मक विचार करने से आपको जो चाहिए वह मिल जाएगा तो यह आपकी गलतफैमि है। आपको सकारात्मक विचार के साथ उस विचार को पूर्ण करने के लिए कार्यशील रहना है। ना दुसरो पर डीपेंडंट रहो ना हातो की लकीरों पर विश्वास रखो, अपने सकारात्मक विचारों से और अपनी कार्यशैली से अपने आप को जित लो। 🏻दुसरो पर विजय पाने वाला वीर कहलाता है। अपने आप पर विजय पाने वाला महावीर कहलाता है।🏻 नकारात्मक व्यक्ती,चीजे और जगह से दुर रहो आप अपने आप ही जीत जाओगे

आप जिस सृष्टी में रहते हो आपके मन द्वारा ही तैयार की हुई है।

आपको सुनते हुए बहुत ही आश्चर्य होगा क्योकी आज का टॉपिक ही ऐसा है। हम जिस तरह से सोचते है उसी प्रकार से हम अपना विश्व बनाते चलते है। मैंने इस विषय पर एक एक्स्प्रिमेंट किया, मैंने कुछ लोगो के ग्रुप्स को अच्छी तरह से परिक्षण किया जिस में से एक बात साफ़ साफ़ प्रूव हो रही थी वो थी आज का टॉपिक मतलब हम जिस सृष्टी में रहते है वो अपने मन द्वारा ही तैयार की हुई है। अब मै आपको मेने किये हुए परिक्षण से बताता हु जब मै परिक्षण कर रहा था तो ध्यान में आया कुछ लोगो का समूह था जो एकदम से सज्जन थे जिन्हें किसी भी तरह की बुरी आदते नहीं थी, एक ऐसा समूह था जिसमे के सारे व्यक्तीयो को बुरी आदते थी, एक ऐसा समूह था जो पॉलिटिक्स में आगे थे तो एक ऐसा समूह था जिनके सपने बहोत बड़े बड़े थे। फिर मैंने इन सब का और एक परिक्षण किया और उससे पता चला की इन समूह में जो भी नया कोई व्यक्ती ऐड होता है वह एक तो पहले से वैसा ही स्वभाव वाला है और नहीं है तो वह स्वभाव से वह इम्प्रेस है और उसे पाने की कोशिश कर रहा है। इस एक्स्प्रिमेंट को आप खुद ही इम्प्लीमेंट कर के देखो खुद पर या किसी और के उपर जिससे ध्यान में आएगा हम व्यक्ती...

कार्यसक्षम बनिए

उठिए और काम करने के लिए सक्षम बनिए।ये जीवन कितने दिनों का है? तुम इस दुनिया में आए हो तो कुछ निशान पीछे छोड़के जाओ नहीं तो आप में और जानवरों में क्या फर्क रहता है? वो भी जन्म लेते है जीवन जीते है और मर जाते है। भगवान ने मौका दिया है यह मानवरूपी जन्म देकर आओ इसे साकार करे। सपने देखिये और उन्हें पुरे करने के हौसले रखिये। इतने सक्षम बनिए लोग आपको देख कर ही मोटीवेट हो जाए और कहे अगर यह इंसान इतना कर सकता है तो में क्यों नहीं। खुद के लिए मिसाल तो बनिए ही, दुसरो के लिए एक मोटिवेशन बनो। आप कर सकते हो किसी को यकीन न हो आप के ऊपर कोई बात नहीं आप खुद पर यकीन रखिये मै आप के उपर हमेशा यकीन रखता हु आप कर लोगे।जिस दिन आप कर लोगे उसदिन सच में आपके लिए एक एतिहासिक दिन होगा

जिंदगी के रंगमंच पर अपना किरदार इस तरह निभाओ यारो, परदा गिरने के बाद भी तालिया रुकनी नहीं चाहिए।

यारो टालीया🏻 तो बजती है पर वो क्यु बज रही है? कोई अच्छा इंसान जब जाता है तब भी लोग टाली🏻 बजायेंगे और बोलेंगे हैट्स ऑफ क्या किरदार था उसका। और कोई बुरा आदमी जाएगा तो भी टाली🏻 बजेगी और लोग बोलेंगे चलो अच्छा हुआ एकबार का गया नाक में दम करके रखा था उसने। जिंदगी में जब भी कुछ करो बड़ा सोच समझ कर करना यारो यह जिंदगी पैदल भी नहीं चलने देती और घोड़े पर भी सवार नही होने देती। जो भी करेंगे सब की सहमती से करेंगे तो इज्जत भी बढ़ेगी और दूजे के प्रती प्यार भी।एक बार अपना इगो एटीट्यूड छोड़ कर सब का सोचो सब आपके बारे में भी अच्छा सोचेगे। जिन्दगी में दौलत नहीं कमाई तो एक बार चल जाएगा पर इज्जत और दुनिया में साथ देने वाले आदमीयो का प्यार जरुर कमाना। इंसान ने क्या कमाया यह तो उसी वक्त पता चलता है जिस दिन उस की अर्थी समशान में जाती है। उस दिन ही लोग उसकी अच्छी बुरी बाते उसकी अंतयात्रा में कह देते है।एक बात याद रखना जिंदगी में ऐसे व्यक्ती भी जरुरी है जो हमें पसंद नहीं है और वह जो हमारी हर एक बात में गलती निकालते है क्योकि ऐसे लोग ही हमें सुझाव देते है हमसे क्या गलती हुई है।उन गलतीयो को पार करके एक ...

value of time- समय का मुल्य

समय का मुल्य है समय नदी की धार की जिसमे सब बह जाया करते है। है समय बड़ा तूफ़ान प्रबल की पर्वत भी झुक जाया करते है। अक्सर दुनिया में लोग समय में चक्कर खाया करते है लेकिन कुछ ऐसे होते जो इतिहास बनाया करते है।             -आशीष मुनिजी समय बड़ा मूल्यवान है। एक बार गया हुआ वक्त फिरसे लोट के नहीं आएगा। चाहे आप पैसे से खरीदो या कोई भी मौल्यवान चीज से एक बार गया हुआ वक्त फिरसे लोटकर नहीं आएगा। वक्त की कदर करना सीखो। आज की यंग जनरेशन का दिन ८:३० बजे चालु होता है जब की शास्त्रों में सूर्योदय के पहले उठना अनिवार्य माना गया है। समय की कीमत बड़ी मौल्यवान है। आज हमारा युवा ८:३० तक अगर बेड पर हो तो देश की प्रगती क्या होगी? हमारा युवा २ घंटे लेट चल रहा है। वक्त का काम अगर वक्त पर होता है तो उसे मंझिल जरुर मिलती है। दो पार्टनर थे उसमे से एक पार्टनर को ३ दिन का समय था। उसे वह कार्य ३ दिन में पूर्ण करना था। पर वह वो कार्य करने के लिए असफल रहा। उसके उस असफलता की वजह से दुसरे पार्टनर का कार्य भी रुक रहा था क्योकि उसका कार्य पहले पार्टनर पर निराधित थ...

आदमी को निचे गिरानेवाला अहंकार से वेगवान मार्ग नहीं है

आत्मशुद्धि मन्त्र के ८ वे एवं ९ वे गाथे में कहा है देख देख तन की सुन्दरता, खुश होकर के फुल रहा। लुट गयी तेरी रूप सम्पदा, सनत चक्री को भूल रहा।।८।। वैभव में मतवाला होकर, घूम रहा जैसे हस्ती। रावण जैसे चले गए, फिर तेरी कोण बता हस्ती।।९।। मै यह कर सकता हु यह कॉन्फिडेंस है दोस्तों पर मेरे सिवा यह काम कोई नहीं कर सकता यह अहंकार है। बड़े बड़े चले गए इस अहंकार रखने के चक्कर में ना रावण बचा ना कंस। इस दुनिया में तू भी खाली हात आया था मै भी खाली हात आया हु तु भी खाली हात जाएगा और मै भी खाली हात जाउगा। फिर क्यों घमन्ड है क्यों अहंकार रखते हो। अहंकारी व्यक्ती का साथ कोई नहीं देता इस जगत में इसी लिए रावण को भी बिबिशन छोड़ आए। दुनिया का नियम है जो गरजता है वह बरसता नहीं इसीलिए मेरे दोस्त छोड़ दो गरजना इस अहंकार के चक्कर में हमें तो बरसना है इस प्रभु की भक्ती में। कितना भी अहंकार रखो एक दिन मिटटी का शरीर है उसकी राख ही होगी। कितना भी ब्रांडेड ले लो दोस्तों कफन का कोई ब्रांड नहीं होता। छोड़ दीजिए अहंकार को आपका १०० प्रतिशत फायदा ही होगा। क्योकी आजकाल अपने को फायदे का सौदा ही पसंद है।

जितना जादा फ़ैल्युअर उतना बड़ा सक्सेस

फैल्युअर के बोहोत फायदे है। फैल्युअर से बड़ा गुरु नहीं। आपका कोनसा फैल्युअर आपके कोनसे सक्सेस के लिए उपयोगी है यह नहीं बोलते आ सकता। काम अपना है फैल्युअर से सीखना। खुद में बदल करना है और चलते रहना है। इस जिद से ही आदमी सक्सेस पाता है। जितने भी यशस्वी लोग है उनको एक बार एनालिसिस करना उनके सक्सेस के पीछे अपयश भी था। बोहोत लोग पीछे का देखते ही नहीं। इसीलिए जब भी संकट आते है वो रुक जाते है और पीछे हट जाते है। किसको पता पीछे वाला रास्ता ही आपके सक्सेस की राह देख रहा है। संकटो में शक्ती नहीं, फ़ैल्युअर में शक्ती है। आदमीको लाइफ में फ़ैल्युअर चाहिए ही, उसके सिवा सक्सेस में मजा भी नहीं आता और बड़ा सक्सेस भी नहीं मिलता। फ़ैल्युअर से आदमी मजबूत बनता चलता है और उसका निर्णय दृढ़ बनता चलता है। गलती ना करने का कॉन्फिडेंस सिर्फ वही दे सकता है जो कोई भी काम नहीं करता

महिलाओं की इज्जत करो

मेरा खुद का एक्सप्रियंस शेयर कर रहा हु। मैं लेटा हुआ था, मेरी पत्नी मेरा सिर सहला रही थी। मैं धीरे-धीरे सो गया। जागा तो वो गले पर विक्स लगा रही थी। मेरी आंख खुली तो उसने पूछा, कुछ आराम मिल रहा है? मैंने हां में सिर हिलाया। तो उसने पूछा कि खाना खाओगे ? मुझे भूख लगी थी, मैंने कहा, “हां।” उसने फटाफट रोटी, सब्जी, दाल, चटनी, सलाद मेरे सामने परोस दिए, और आधा लेटे- लेटे मेरे मुंह में कौर डालती रही।मैने चुपचाप खाना खाया, और लेट गया। पत्नी ने मुझे अपने हाथों से खिला कर खुद को खुश महसूस किया और रसोई में चली गई। मैं चुपचाप लेटा रहा।सोचता रहा कि पुरुष भी कैसे होते हैं ? कुछ दिन पहले मेरी पत्नी बीमार थी, मैंने कुछ नहीं किया था। और एक फोन करके उसका हाल भी नहीं पूछा।उसने पूरे दिन कुछ नहीं खाया था, लेकिन मैंने उसे ब्रेड परोस कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहा था। मैंने ये देखने की कोशिश भी नहीं की कि उसे वाकई कितना बुखार था।मैंने ऐसा कुछ नहीं किया कि उसे लगे कि बीमारी में वो अकेली नहीं। लेकिन मुझे सिर्फ जरा सी सर्दी हुई थी, और वो मेरी मां बन गई ।मैं सोचता रहा कि क्या सचमुच महिलाओं को भगवान ए...

अपने जीवन का विधाता खुद बने

जीवन का विधाता बनना है तो  नसीब को मत कोसो। नसीब को कोसनेवाला अपनी प्रगती शक्ती विकार को किनारे कर देता है -पू. आचार्यदेव राजयशसुरिश्वरजी म. सा. विधाता बनना है तो अपना रास्ता अपने आप धुन्ड़ते चलो दुनिया का नियम है जो मानव शास्त्र से जुडीटी है इसे लॉ ऑफ़ लीडिंग कहते है। वह इस प्रकार है मानव में वह शक्ती है जो अपनी राह खुद बनाकर संसार को उस राह पर चला सकते है। हम इंसान आज भी हर एक चीज के लिए दुसरे के ऊपर डीपेंडंट रहते है। इसमें आप भी है और मई भी हु। लॉ के अनुसार इंसान जिस प्रकार लीड करता चलता है उतना ही  वह इंडीपेंडंट बनता चलता है। इसी लिए जरूरी है के आप जितना जादा हम लीड करेंगे और रास्ता धून्डते चलेंगे उतना ही हम अपने जीवन के विधाता बनने में कामयाब होते चलेंगे। सिध्दी साहस में बसती है, कोसने में नहीं। अपने काम में किसीको मत कोसो। विधाता बनना है तो होसला बढाओ, साहस जुटाओ, हिम्मत बढ़ाओ, साहस जुटाओ की तुम्हारी राह पर चलने के लिए दुनिया विवश हो जाए। विधाता बनने के लिए लम्बी उम्र जरुरी नहीं। लम्बा जीवन हो तभी जीवन निर्माण होगा यह बात सत्य नहीं है। अच्छी जिन्दगी के लिए लम्ब...

जोड़े वह धर्म तोड़े वह अधर्म

सबसे पहले धर्म की व्याख्या आपको बतादू आत्मा का आत्मा द्वारा आत्मा के लिए किया हुआ आत्मकल्याण ही धर्म है। जीवन के व्यवहार में परिवार में सभी को जोड़ने वाला कोई तत्व है तो वह प्यार है। परिवार का प्यार धरती का स्वर्ग है। -आचार्य राजयशसुरिश्वरजी म.सा. परिवार में सब के मन को देखते रहे, सब के मन को सवारते रहे वो प्यार है। वह धर्म है। भले ही सम्पत्ती न हो पर सब के बिच परस्पर प्रेम है, आनंद है, वह स्वर्ग है। हमारी संस्कृती जहा सहनशीलता पर हमारी आस्था थी। मंदिर और मूर्ती टूटने से ही धर्म का नाश होता है यह बात पर्याप्त नहीं, आस्था टूटती है वहा धर्म का नाश होता है और अधर्म का आगमन होता है। तलाक आज घर घर की कहानी बन गई है। हमारे समाज में तलाक याने सम्बन्ध का तोडना अधर्म है। कबीर जी कहते है “पोथी पढ़ पढ़ जग मुओ, पंडित भयो न कोय ढाई अक्षर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय” इस पंक्ती में जीवन आदर्श की कुंजी है। धर्म का सही अर्थ आत्मकल्याण है। आत्मा का स्वभाव ज्ञान,दर्शन और चारित्र में है। वही धर्म है। ज्ञान याने पदार्थ को जानना। दर्शन याने पदार्थ के स्वरुप में आस्था रखना। चारित्र याने अच्छे बुरे में ...

कैसे समझाए अपने मन की बात? कैसे मनाए

इस दुनिया में अगर आप को आपके मन की बात किसी को कहनी है तो आप क्या करेंगे जिससे आपने बोली हुई बात सब सुने? आपकी बात अगर आपको सब को मनवानी है तो उन्हें अनुभव कराए की आप क्या बोलना चाहते हो। अमेरिकन लेखक माया कहते है जो कुछ आप बोलेंगे, या करेंगे लोग उसे भूल जाएंगे, परन्तु जो कुछ आप उन्हें अनुभव कराएँगे वे कभी नही भूल पाएंगे। -माया आगलोन(अमेरिकन लेखक) एक लड़के इंजीनियरिंग(स्टूडेंट) को कॉलेज में आधे में ही ब्रांच चेंज करनी है तो वो अपने माँ पिता को कैसे मनाएगा। अगर वो बोलेगा तो उसके माँ पिता रेडी भी होगे क्या? तो वो क्या करे जिससे उसके माँ पिता रेडी हो? उत्तर है फिलिंग(अनुभव) सबसे पहले उसे उसके लाभ और दुर्लाभ समझाने पड़ेगे। और घरवालो को विश्वास दिलाना होगा की वो ब्रांच चेंज करके भी कवर कर सकता है। यह अनुभव उसे दिलाना पड़ेगा तब जाकर उसके माँ पिता रेडी होगे। शायद नहीं भी होगे पर अगर उसको चेंज करना है तो उसे अनुभव दिलाना पड़ेगा। इस बात से समझ में आएगा अगर आपको कोनसी भी बात किसी से मनवानी है तो आपको अनुभव करवाना होगा की वह सही है और वह आप के लिए उचित है। इस बात को आप अप्लाई कर सकते है...

कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता

कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता आजकल लोग बोहोत बड़ी गलतफैमी में रहते है और वह है पोजीशन की। जो कोई हो वो अपने पोजीशन से अपने पोजीशन के निचे वाले के कार्य को आज करना नहीं चाहता। आदमी का रुतबा कितना भी बड़ा हो पर अगर वो छोटा काम करने के लिए तैयार नही है चाहे उसकी कितनी भी पोजीशन हे कितने भी पैसे हो उसके पास फिर भी वह इंसान की कीमत मेरे लिए बोहोत छोटी है। इंसान उसके नाम से नहीं उसके काम से जाना जाता है। चाहे आपके पास कितने भी पैसे हो इज्जत हो पर अगर आप कार्य को महत्त्व नहीं देते तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिनके ऊपर पुरे भारत की जिम्मेदारी थी वह इंसान छोटे छोटे काम भी करते थे। जो इन्सान पुरे देश को चलाना चाहता है उसका कण्ट्रोल सबसे पहले खुद पर होना चाहिए। इसीलिए बापुजी को महात्मा सम्बोधा गया। वही सुन्दर होता है जो सुन्दर काम करे। एक आदमी जो सरकारी अफसर है वह महीने के ३०,००० कमाता है और एक ऐसा इंसान है जो गटार साफ़ करता है जिसे सिर्फ ३००० रुपये प्रति माह मिलते है। दोनों को एक ही नजर से देखना चाहिए। पर आज की दुनिया में ऐसा नहीं होता। और अगर वह सरकारी ...

समर्थन और विरोध आदमी का नहीं विचारों का कीजिए

समर्थन और विरोध केवल विचारों का होना चाहिये, किसी व्यक्ति का नहीं.. क्योंकि अच्छा व्यक्ति भी गलत विचार रख सकता है..और किसी बुरे व्यक्ति का भी कोई विचार सही हो सकता है.. ‘मत’ भेद कभी भी ‘मन’ भेद         नहीं बनने चाहिए इस दुनिया में कोण व्यक्ती अच्छा है और कोण व्यक्ती बुरा है यह उसके विचारों से और कर्मो पर डिपेंड होता है। इस दुनिया में दुनियादारी निभाने के लिए हमें हर अच्छे बुरे व्यक्ती से कांटेक्ट रखना पड़ता है। तो दुनियादारी के लिए सफल जीवन जीने के लिए दुनियादारी निभाने के लिए सभी से बात करनी पड़ती है। आदमी अच्छा या बुरा नहीं होता उसके विचार अच्छे या बुरे होते है।

भगवान पर पुर्ण विश्वास रखो

भगवान पर पुर्ण विश्वास रखो विश्वास करो- मैंने तुम्हारे लिए वही विधान किया जो तुम्हारे लिए उचित था। आज तक मैंने जो कुछ किया तुम्हारे उचित के लिए किया – श्री कृष्ण भगवान पर विश्वास रखो। आप जिस भगवान को मानते हो उनको मानो चाहे वह भोलेनाथ हो या चाहे अल्ला। चाहे वह वाहे गुरु हो या चाहे वह महावीर। जिस भी भगवान को मानो पुरे श्रद्धा के साथ मानो। मैंने या किसीने भी नहीं देखा की इस दुनिया में भगवान है या नहीं। पर मैंने अनुभव किया है। भगवान जो भी करता है उसमे अपना अच्छा ही छुपा है। पर हम समझ नहीं पाते,  और भगवान को कोसते बैठते है। भगवान और कोई नहीं हमारा विश्वास है। भगवन हमारे हमेशा साथ है सामने नहीं तो आसपास है पलके बंद कर और दिल से याद करो वह कोई नहीं हमारा विश्वास है। विश्वास रखो भगवान पर आपकी सब मुश्किलें कम होती जाएगी। हर एक काम आपका आसान होगा अगर आप भगवान पर विश्वास रखोगे। विश्वास पे अपार शक्ती है। भगवान से कुछ मांगो और अगर वो आपको ना मिले तो नाराज न होना क्योकी भगवान वो नहीं देता जो आपको अच्छा लगता है, भगवान वो देता है जो आपके लिए अच्छा होता है। भगवान श्रीकृष्ण ने भगवत गीता म...

खुद की गलती स्वीकारने में कभी संकोच मत करो

गलतिया लाख करो क्योकी आदमी जब गलती करता है तभी वह कुछ नया सीखता है। जो इन्सान कोई भी गलती नहीं करता तो समझ लेना की वो इन्सान कोई भी काम नहीं करता। गलतियों से डरो मत उनका सामना करो। गलतियों पर पर्दा मत डालो। गलतियों पर पर्दा डालने की आदत इंसान को कुछ नया करने से हरवक्त रोख लगाती है। गलतियों से आगे सीखना ही जिन्दगी है। जीवन जीने का मुख्य उद्देश है अपनी गलतियों को सुधारो। अगर आप नहीं चाहते की आप की गलती सब को पता ना चले तो कोई बात नहीं पर आपकी गलती आप खुद से छुपा रहे हो तो आप गलत ट्रैक पर है। खुद की गलती पर पर्दा डालना ही सबसे बड़ी गलती है। आज कक जितने भी बड़े व्यक्ती है उनका अगर इतिहास देखा जाए तो पता चलता है वो अपनी गलतियों को सुधारकर ही आगे बढे है। महात्मा गाँधी जी ने बचपन में चोरी की थी। पर उन्होंने अपने गलती को सुधार कर जिंदगी में कभी भी चोरी नहीं की। आज सब उन्हें महात्मा कहते है। जीन्दगी में हजार गलतिया करो पर एक गलती हजार बार मत करो। एक गलती अगर आप हजार बार दोहराते है तो आप मुर्ख ही कहलाओगे। और पहले गलती में ही उसे सुधार लेते है तो आप एक महान व्यक्ती है। बड़ी बड़ी कम्पनीयो में...

प्रेम कुछ भी नहीं सिर्फ एक एहसास है

दुनिया में बहोत सारे रिश्ते है जिनके अंदर प्रेम है। जिनमे माँ बेटा, बहन भाई, पती पत्नी, कुछ ऐसे जिनसे कोई भी रिश्ता नहीं होता फिर भी प्रेम होता है। जैसे दोस्त, अपने देश प्रति प्रेम, मजहब, और न जाने कितने और। प्रेम इस शब्द का अर्थ बोहोत ही बड़ा है। क्यु करते है हम एक दूजे से प्रेम? क्यु हम प्रेम में एक दूजे के लिए जीते है? एक दूजे की केयर लेते है? प्रेम और कुछ नहीं एक एहसास है। जिस एहसास की डोर से हम उनके प्रति आदर सन्मान और प्रेम व्यक्त करते है। एक लास्ट पोस्ट में मैंने प्रेम प्रेम में कितनी शक्ती है वह बताया था। प्रेम में अपार शक्ती है। पर प्रेम एक एहसास है। आप जितना एहसास करवाते जाओगे उतना ही आपका प्रेम बढ़ेगा। प्रेम नाम सुनने में कितना शीतल लगता है। जहा जहा नफरत की दीवार बनती है उसे तोड़ने का काम प्यार कारता है। जहा नफरत बढ़ेगी वहा एहसास दिलाना, प्यार जताना वह दीवार अपने आप टूट जाएगी। हर वक्त प्रेम यानी एक ही बात सम्भोधी जाती है। और फिल्म इंडस्ट्री ने तो इसका पुरी तरह से कचरा कर के रखा है। प्रेम याने हर वो एहसास जो आपको आपके अपनों से बात करने पर मजबुर करे। उनके साथ पल बिताने...

अपनी कमजोरी को अपनी ताकद बनाओ

इस दुनिया में हर एक व्यक्ती में कोई न कोई कमजोरी होती ही है। चाहे वह कोई भी हो उससे डरो मत उसका सामना करना सीखो। आप कमजोरी से जितना भागोगे वह उतनी बड़ी बनती जाएगी। एक उदाहरण से आपको समझ में आ जाएगा। अगर मेरी नजर कमजोर हो गयी है। और उसपर में ध्यान नहीं दे रहा। मतलब उस चीज से में बाग़ रहा हु तो वह बढ़ेगी। और अगर में सही वक्त पर ही चश्मा लगा ता हु और उसका इस्तमाल करता हु तो जो मेरे चश्मे का नंबर है वह धिरे धिरे कम होते चला जाएगा। अगर आप उससे भागोगे तो वह नंबर बढ़ता ही चला जाएगा। दुनिया में हर एक की कमजोरिया है। पर कमजोरियों से भाग के कोई फायदा नहीं। सबसे पहले आपकी कमजोरियों के ढूंडो और उसी कमजोरी को अपनी ताकद कैसे बनाते आएगा इस पर ध्यान दो। एक लड़की थी जिसकी कमजोरी उसकी सुन्दरता थी। वो जहा रहती थी वहा एक लड़का उसे हर वक्त परेशान करता था। उसे छेड़ता था। उसकी कमजोरी थी वह लड़का। वो भला कितने दिन उस कमजोरी से भागती। वह परेशान हो चुकी थी। उसे देखने कोई लड़का आता तो वह उसे भी भगा देता। उस लड़की ने एक किया जिससे उसकी कमजोरी ही उसकी ताकद बन गयी। उस लड़की ने उअ लड़के को राखी बांध दी और भाई मान लिय...