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कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता

कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता
आजकल लोग बोहोत बड़ी गलतफैमी में रहते है और वह है पोजीशन की। जो कोई हो वो अपने पोजीशन से अपने पोजीशन के निचे वाले के कार्य को आज करना नहीं चाहता। आदमी का रुतबा कितना भी बड़ा हो पर अगर वो छोटा काम करने के लिए तैयार नही है चाहे उसकी कितनी भी पोजीशन हे कितने भी पैसे हो उसके पास फिर भी वह इंसान की कीमत मेरे लिए बोहोत छोटी है।
इंसान उसके नाम से नहीं उसके काम से जाना जाता है।
चाहे आपके पास कितने भी पैसे हो इज्जत हो पर अगर आप कार्य को महत्त्व नहीं देते तो यह आपकी सबसे बड़ी भूल है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जिनके ऊपर पुरे भारत की जिम्मेदारी थी वह इंसान छोटे छोटे काम भी करते थे। जो इन्सान पुरे देश को चलाना चाहता है उसका कण्ट्रोल सबसे पहले खुद पर होना चाहिए। इसीलिए बापुजी को महात्मा सम्बोधा गया।
वही सुन्दर होता है जो सुन्दर काम करे।
एक आदमी जो सरकारी अफसर है वह महीने के ३०,००० कमाता है और एक ऐसा इंसान है जो गटार साफ़ करता है जिसे सिर्फ ३००० रुपये प्रति माह मिलते है। दोनों को एक ही नजर से देखना चाहिए। पर आज की दुनिया में ऐसा नहीं होता। और अगर वह सरकारी अफसर रिश्वत लेता है तो उससे वह गटार साफ़ करनेवाला बहतर है।
एक बात सोचो अगर आप जो कार्य कर रहे है वह अगर इस दुनिया में कोई नहीं करता तो क्या होता? इसीलिए कोई भी कार्य छोटा या बड़ा नहीं होता। इन्सान जैसे सोचता है उस प्रकार ही वो कार्य को महत्त्व देता है।
आजकल व्यक्ती को अपने घर के काम करने में भी शर्म आती है। मिटटी पर बैठने पर शर्म आती है। सवाल खुद से करो। इंसान का शरीर ही मिटटी है फिर मिटटी पर बैठने से क्या शरमाना।
आज बोला जाता है इन्सान सेल्फ़ डीपेंडंट बन गया है और अगर वो अपने खुद के जरुरत के काम नहीं कर सकता तो वो कैसे सेल्फ डेपेन्डट कैसे हो सकता है।
आदमी अपनी श्रेष्ठता अगर अपने कार्य को दे यही उस आदमी की श्रेष्ठता है

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