आपको सुनते हुए बहुत ही आश्चर्य होगा क्योकी आज का टॉपिक ही ऐसा है।
हम जिस तरह से सोचते है उसी प्रकार से हम अपना विश्व बनाते चलते है।
मैंने इस विषय पर एक एक्स्प्रिमेंट किया, मैंने कुछ लोगो के ग्रुप्स को अच्छी तरह से परिक्षण किया जिस में से एक बात साफ़ साफ़ प्रूव हो रही थी वो थी आज का टॉपिक मतलब हम जिस सृष्टी में रहते है वो अपने मन द्वारा ही तैयार की हुई है। अब मै आपको मेने किये हुए परिक्षण से बताता हु
जब मै परिक्षण कर रहा था तो ध्यान में आया कुछ लोगो का समूह था जो एकदम से सज्जन थे जिन्हें किसी भी तरह की बुरी आदते नहीं थी, एक ऐसा समूह था जिसमे के सारे व्यक्तीयो को बुरी आदते थी, एक ऐसा समूह था जो पॉलिटिक्स में आगे थे तो एक ऐसा समूह था जिनके सपने बहोत बड़े बड़े थे। फिर मैंने इन सब का और एक परिक्षण किया और उससे पता चला की इन समूह में जो भी नया कोई व्यक्ती ऐड होता है वह एक तो पहले से वैसा ही स्वभाव वाला है और नहीं है तो वह स्वभाव से वह इम्प्रेस है और उसे पाने की कोशिश कर रहा है।
इस एक्स्प्रिमेंट को आप खुद ही इम्प्लीमेंट कर के देखो खुद पर या किसी और के उपर जिससे ध्यान में आएगा हम व्यक्ती जिस स्वभाव के होते है उससे मैच होने वाला या जुड़ने वाला स्वभाव वाला व्यक्ती हम खुद ही धुन्ड़ते चलते है यानि की अपना विश्व अपनी जिंदगी अपन खुद डिजाईन करते है।
तो यह फर्क नहीं पड़ता की आपको भगवान ने कैसे बनाया, फर्क यह पड़ता है आपने आपकी लाइफ किस तरह डिजाईन की।
जिंदगी अपनी है अपने को ही डिजाईन करनी है अपने गोल्स सपने पुरे करने के लिए किस चीज की हमें जरुरत है उसे पाने के लिए उसे डिजाईन कैसे करना है यह हमें खुद को पता होना चाहिए।
हम जिस तरह से सोचते है उसी प्रकार से हम अपना विश्व बनाते चलते है।
मैंने इस विषय पर एक एक्स्प्रिमेंट किया, मैंने कुछ लोगो के ग्रुप्स को अच्छी तरह से परिक्षण किया जिस में से एक बात साफ़ साफ़ प्रूव हो रही थी वो थी आज का टॉपिक मतलब हम जिस सृष्टी में रहते है वो अपने मन द्वारा ही तैयार की हुई है। अब मै आपको मेने किये हुए परिक्षण से बताता हु
जब मै परिक्षण कर रहा था तो ध्यान में आया कुछ लोगो का समूह था जो एकदम से सज्जन थे जिन्हें किसी भी तरह की बुरी आदते नहीं थी, एक ऐसा समूह था जिसमे के सारे व्यक्तीयो को बुरी आदते थी, एक ऐसा समूह था जो पॉलिटिक्स में आगे थे तो एक ऐसा समूह था जिनके सपने बहोत बड़े बड़े थे। फिर मैंने इन सब का और एक परिक्षण किया और उससे पता चला की इन समूह में जो भी नया कोई व्यक्ती ऐड होता है वह एक तो पहले से वैसा ही स्वभाव वाला है और नहीं है तो वह स्वभाव से वह इम्प्रेस है और उसे पाने की कोशिश कर रहा है।
इस एक्स्प्रिमेंट को आप खुद ही इम्प्लीमेंट कर के देखो खुद पर या किसी और के उपर जिससे ध्यान में आएगा हम व्यक्ती जिस स्वभाव के होते है उससे मैच होने वाला या जुड़ने वाला स्वभाव वाला व्यक्ती हम खुद ही धुन्ड़ते चलते है यानि की अपना विश्व अपनी जिंदगी अपन खुद डिजाईन करते है।
तो यह फर्क नहीं पड़ता की आपको भगवान ने कैसे बनाया, फर्क यह पड़ता है आपने आपकी लाइफ किस तरह डिजाईन की।
जिंदगी अपनी है अपने को ही डिजाईन करनी है अपने गोल्स सपने पुरे करने के लिए किस चीज की हमें जरुरत है उसे पाने के लिए उसे डिजाईन कैसे करना है यह हमें खुद को पता होना चाहिए।
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