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अपने जीवन का विधाता खुद बने

जीवन का विधाता बनना है तो  नसीब को मत कोसो। नसीब को कोसनेवाला अपनी प्रगती शक्ती विकार को किनारे कर देता है
-पू. आचार्यदेव राजयशसुरिश्वरजी म. सा.
विधाता बनना है तो अपना रास्ता अपने आप धुन्ड़ते चलो
दुनिया का नियम है जो मानव शास्त्र से जुडीटी है इसे लॉ ऑफ़ लीडिंग कहते है। वह इस प्रकार है
मानव में वह शक्ती है जो अपनी राह खुद बनाकर संसार को उस राह पर चला सकते है।
हम इंसान आज भी हर एक चीज के लिए दुसरे के ऊपर डीपेंडंट रहते है। इसमें आप भी है और मई भी हु। लॉ के अनुसार इंसान जिस प्रकार लीड करता चलता है उतना ही  वह इंडीपेंडंट बनता चलता है। इसी लिए जरूरी है के आप जितना जादा हम लीड करेंगे और रास्ता धून्डते चलेंगे उतना ही हम अपने जीवन के विधाता बनने में कामयाब होते चलेंगे।
सिध्दी साहस में बसती है, कोसने में नहीं। अपने काम में किसीको मत कोसो। विधाता बनना है तो होसला बढाओ, साहस जुटाओ, हिम्मत बढ़ाओ, साहस जुटाओ की तुम्हारी राह पर चलने के लिए दुनिया विवश हो जाए।
विधाता बनने के लिए लम्बी उम्र जरुरी नहीं। लम्बा जीवन हो तभी जीवन निर्माण होगा यह बात सत्य नहीं है। अच्छी जिन्दगी के लिए लम्बी जिन्दगी की नही “उपयोगी जिन्दगी” की अवश्यकता है।
अच्छी जिन्दगी के लिए विधाता बनने के लिए अच्छी परिस्थिति की जरुरत नहीं है। जो परिस्थति है उसमे ही जो रास्ता धुंड ले वही सच्चा विधाता बन सकता है।
झरने को या नदी को सागर का रास्ता पूछने की जरुरत नही वो अपना रास्ता खुद बनाता है और अपने जीवन का विधाता खुद बनता है।
मैंने एक लड़के का स्टेटस देखा
“Leading people for better life”
उस लड़के की उम्र कुछ अठरा उन्निस होगी। मुझे उसका स्टेटस देखकर बहुत अच्छा लगा। मैंने उस लड़के से बात की तो उससे बहोत सी बाते सिखने को मिली। वह लड़का उसके ड्रीम्स को पाने के लिए चोबिसो घंटे चाहे दिन हो या रात काम कर रहा था और जब मैंने परिक्षण किया तो वह अबतक बोहोत ही सक्सेसफुल था बोहोत कम उम्र में उसने छोटे छोटे ही सही पर उसके उम्र के मान से बोहोटी बड़े प्रोजेक्ट्स हैंडल कर रहा था और उसका ड्रीम प्रोजेक्ट बोहोत ही बड़ा था। और मुझे यकीन है वह उसमे भी सक्सेस जरुर पाएगा क्योकि उसके हौसले बुलंद है वह निडर है। और वह अपने जीवन का विधाता खुद है। तभी मुझे ध्यान में आया के विधाता बनने के लिए लम्बी उम्र की नही उपयोगी उम्र की जरुरत है।
उस लड़के की उम्र में उसके सपने पर हसने वाले बोहोत थे पर जो दुनिया उसके ऊपर कल हसती थी आज उसीको सलाम ठोकती है। आज मै भी उसे सलाम ठोकता हु क्योकि उसने मुझे भी बोहोत कुछ सिखाया है।

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