मित्र और शत्रु अपने व्यवहार से बनते है।
कोई भी व्यक्ति हमारा मित्र या शत्रु बनकर संसार में नही आता..।
हमारा व्यवहार और शब्द ही लोगो को मित्र और शत्रु बनाते है…॥
फर्क सिर्फ सोच का होता हैं..
सकारात्मक या नकारात्मक.!
वरना सीढियां वही होती है –
जो किसी के लिए ऊपर जाती हैं,
और किसी के लिए नीचे आती हैं।
कोई भी व्यक्ति हमारा मित्र या शत्रु बनकर संसार में नही आता..।
हमारा व्यवहार और शब्द ही लोगो को मित्र और शत्रु बनाते है…॥
फर्क सिर्फ सोच का होता हैं..
सकारात्मक या नकारात्मक.!
वरना सीढियां वही होती है –
जो किसी के लिए ऊपर जाती हैं,
और किसी के लिए नीचे आती हैं।
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