अपने पीछे खड़े व्यक्ती को भी कभी आगे जाने का मौका दो।
आज हम सब एक रेस में भाग रहे है। एक ऐसी रेस जिसमे हम हमेशा आगे ही रहना चाहते है। हम सबको सिर्फ पीछे छोड़ते जाते है। हम किसीको हमसे आगे जाने का तो छोड़ो हमारे साथ भी खड़े होना नहीं देना चाहते।
अगर आप दुसरो को भी आगे जाने का मौका दो गे तो उसे आपके प्रती हमदर्दी बढ़ेगी और हर एक को सफल होने का चांस मिलेगा। हमें कुछ बातो ने इस प्रकार जखड कर रखा है जिस के कारण हम अगर घर से ही शुरवात करे तो आपको बताने की जरूरत ही नहीं। घर में ही इतना डर्टी पॉलिटिक्स खेलते देखा है लोगो को तो डर लगता है रियल पॉलिटिक्स देखने का।
अपने बेटे को अपनी पत्नी को भी मौका दो आगे जाने का।
मौका दे मतलब क्या करे?
अगर आप का बेटा उम्र में आ गया है तो उस पर जिम्मेदारिया डालना शुरू कर दो आप उसे आगे आने का मौका नहीं दो गे तो वो कैसे सिख पाएगा। वह तो जिम्मेदारियों से भागता ही रहेगा। आपकी बेटी को सिखाओ जिम्मेदारी क्या होती है। क्युकी वह तो दो घर के दीपक को रोशन करने वाली होती है। यह चीज जादा तर तभी होगी जब आप उनको आप से आगे जाने का मौका देंगे। इससे आपकी कोई इज्जत कम नहीं होगी, अगर आपका बेटा और बेटी जिम्मेदारी या संभालने में आप से आगे जाते है तो आप का ही नाम रोशन करेंगे। पर बहुतांश बार ऐसा नहीं हो पता क्युकी हमे जखड कर रखा है कुछ बातो ने जैसे
एक बार में दोस्तों के साथ घुमने गया था वहा मै उनके साथ शौपिंग के लिए गया कपड़ो की खरेदी कर रहा था तो मैंने अपने पत्नी से फ़ोन पर पूछा कोनसा कलर का शर्ट लु? उतने में ही दोस्त मेरा मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे के इसमें पत्नी को क्या पूछना? इतना पत्नी को भाव नहीं देना चाहिए। मै तो मेरी पत्नी से कभी नहीं पूछता। उसका काम रसोई का है वह करेगी वो।
हम क्या करते है पता है- हम किसीको आगे जाने का मौका ही नहीं देते। इसमें क्या बुरी बात है अगर में अपनी पत्नी को पसंद के कपडे चॉइस करू तो। अगर आप अपनी पत्नी को आगे नहीं जाने दे सकते तो आप किसी और को क्या चांस दोगे। मैंने बहुत से पोस्ट में बताया है दुनिया का एक रूल है- दुनिया हम को वही लौटती है जो हम दुनिया को देते है। तो अगर आप आगे जाना चाहते हो तो दुसरो को भी आगे जाने देना सीखो। शुरवात घर से करो। कभी कभी आपने खुद किया हुआ काम का श्रेय भी दुसरे को देना पड़े तो चलेगा कोई बात नहीं।
आज हम सब एक रेस में भाग रहे है। एक ऐसी रेस जिसमे हम हमेशा आगे ही रहना चाहते है। हम सबको सिर्फ पीछे छोड़ते जाते है। हम किसीको हमसे आगे जाने का तो छोड़ो हमारे साथ भी खड़े होना नहीं देना चाहते।
अगर आप दुसरो को भी आगे जाने का मौका दो गे तो उसे आपके प्रती हमदर्दी बढ़ेगी और हर एक को सफल होने का चांस मिलेगा। हमें कुछ बातो ने इस प्रकार जखड कर रखा है जिस के कारण हम अगर घर से ही शुरवात करे तो आपको बताने की जरूरत ही नहीं। घर में ही इतना डर्टी पॉलिटिक्स खेलते देखा है लोगो को तो डर लगता है रियल पॉलिटिक्स देखने का।
अपने बेटे को अपनी पत्नी को भी मौका दो आगे जाने का।
मौका दे मतलब क्या करे?
अगर आप का बेटा उम्र में आ गया है तो उस पर जिम्मेदारिया डालना शुरू कर दो आप उसे आगे आने का मौका नहीं दो गे तो वो कैसे सिख पाएगा। वह तो जिम्मेदारियों से भागता ही रहेगा। आपकी बेटी को सिखाओ जिम्मेदारी क्या होती है। क्युकी वह तो दो घर के दीपक को रोशन करने वाली होती है। यह चीज जादा तर तभी होगी जब आप उनको आप से आगे जाने का मौका देंगे। इससे आपकी कोई इज्जत कम नहीं होगी, अगर आपका बेटा और बेटी जिम्मेदारी या संभालने में आप से आगे जाते है तो आप का ही नाम रोशन करेंगे। पर बहुतांश बार ऐसा नहीं हो पता क्युकी हमे जखड कर रखा है कुछ बातो ने जैसे
एक बार में दोस्तों के साथ घुमने गया था वहा मै उनके साथ शौपिंग के लिए गया कपड़ो की खरेदी कर रहा था तो मैंने अपने पत्नी से फ़ोन पर पूछा कोनसा कलर का शर्ट लु? उतने में ही दोस्त मेरा मजाक उड़ाने लगे और कहने लगे के इसमें पत्नी को क्या पूछना? इतना पत्नी को भाव नहीं देना चाहिए। मै तो मेरी पत्नी से कभी नहीं पूछता। उसका काम रसोई का है वह करेगी वो।
हम क्या करते है पता है- हम किसीको आगे जाने का मौका ही नहीं देते। इसमें क्या बुरी बात है अगर में अपनी पत्नी को पसंद के कपडे चॉइस करू तो। अगर आप अपनी पत्नी को आगे नहीं जाने दे सकते तो आप किसी और को क्या चांस दोगे। मैंने बहुत से पोस्ट में बताया है दुनिया का एक रूल है- दुनिया हम को वही लौटती है जो हम दुनिया को देते है। तो अगर आप आगे जाना चाहते हो तो दुसरो को भी आगे जाने देना सीखो। शुरवात घर से करो। कभी कभी आपने खुद किया हुआ काम का श्रेय भी दुसरे को देना पड़े तो चलेगा कोई बात नहीं।
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